बुधवार, 10 अक्तूबर 2007

मोबाइल

काश मन एक मोबाइल होता
और इसमे एक ऑप्शन होता
इरेज!
तो दुनियां के बहुत सारे लोग,
अपनी बहुत सारी परेशानियों से
'निजात'
पा जाते।

3 टिप्‍पणियां:

anuradha srivastav ने कहा…

हाहाहाहाहाहा काश हो पाता ये सब। सारी की जगह साडी हो गया है थोडा सा ध्यान दीजियेगा ।

संजीव कुमार सिन्हा ने कहा…

चिटठाजगत में आपका स्‍वागत है।

विनीत कुमार ने कहा…

aur ek batan hota recharge ka jab udaas hote to daba dete aur is tarah se mobile jitne hi batan man ki mobile me hi hote jo sirf insaan ke liyae kaam karte

आशीष कुमार 'अंशु'

आशीष कुमार 'अंशु'
वंदे मातरम