शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

डा विश्वनाथ त्रिपाठी का खाना


1 टिप्पणी:

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…

लग नहीं रहा था कि कविता इतनी सुन्दर होगी ..
पर , गजब सहजता और तल्लीनता में सधी है कविता ..
कवि , काव्य-विषय और कविता को नमस्कार !

आशीष कुमार 'अंशु'

आशीष कुमार 'अंशु'
वंदे मातरम