रविवार, 18 मई 2008

प्रदीप भाई के घर से अक्ल की चोरी








































इस बार कुछ अपने और अपने ब्लॉग साथियों के मतलब की चीज प्रदीप भाई के भोपाल वाले कमरे से निकाल कर लाया हूँ। प्रदीप भोपाल में ओक्सफेम की तरफ़ से शहरी गरीबों के हालात पर एक अध्यन कर रहे हैं।

ख़ैर, अपन पोस्टर पढ़ते हैं।

2 टिप्‍पणियां:

YUVA ने कहा…

keho bahi kaise ho....accha lega humri phot bhi hai aapke blog per...
focut mao publicity k liye ..thank u

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

क्या चोरी है। वैसे यह चोरी तारीफ के काबिल है।

आशीष कुमार 'अंशु'

आशीष कुमार 'अंशु'
वंदे मातरम