सोमवार, 29 सितंबर 2008

बैनर क्लास सेवा की जय - बिहार बाढ़

भाई बाढ़ पीड़ित सुपौल के डपरखा बाढ़ राहत शिविर में इस शिक्षा केन्द्र का बैनर देखने को मिला। मुझे लगता है बाढ़ की वजह से जल्दबाजी में 'आनंदमयी' की जगह कुछ और लिखवा कर लगवा दिया, संयोजकों ने। जो लिखा है वह ठीक है तो कोई गल नहीं, यदि भूल हुई है तो सुधार ली जाए। वैसे भी बिहार के बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में बैनर का धंधा जोरों पर है। काम भले ही कुछ भी ना हो। लेकिन संस्थाओं ने बैनर लगाने में कोई कोताही नहीं की है। सहरसा में एक बैनर बनाने वाले ने बताया कि उसने एक महीने में १५०० बैनर बनाएं हैं। और सिर्फ़ सहरसा में आप सब की जानकारी के लिए बता दूँ, लगभग आधा दर्जन दूकानों में बैनर बनाने का काम चल रहा है अब इस नए जमाने की बैनर क्लास सेवा के लिए क्या कहूं। शब्द नहीं हैं मेरे पास।

1 टिप्पणी:

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

तीर स्नेह-विश्वास का चलायें,
नफरत-हिंसा को मार गिराएँ।
हर्ष-उमंग के फूटें पटाखे,
विजयादशमी कुछ इस तरह मनाएँ।

बुराई पर अच्छाई की विजय के पावन-पर्व पर हम सब मिल कर अपने भीतर के रावण को मार गिरायें और विजयादशमी को सार्थक बनाएं।

आशीष कुमार 'अंशु'

आशीष कुमार 'अंशु'
वंदे मातरम