शुक्रवार, 1 अगस्त 2008

चार तरफ़ से बांग्लादेश से घीरा 'तीन बीघा'


नाम सनोज कानू पिता का नाम छोटे लाल कानू, ग्राम चेंगराबंदाबन्दा मेखलीगंज सबडिविजन, कूचविहार। यह उसका नाम पता है. भारत और बांग्लादेश के ठीक बॉर्डर पर सनोज रहता है. उसी ने बताया - आपको भारतीयों द्वारा लगाया गया वह नारा याद होगा, 'जान दीबो, प्राण दीबो - तीन बीघा दीबो नाय'. चारों तरफ़ बार से घीरा तीन बीघा एक एतिहासिक तीर्थ ही है. क्योंकि चार तरफ़ से बांग्लादेश है और बीच में भारत का यह हिस्सा है. बंगलादेश के लोगों के लिए बीच में एक छोटी सी सडकनुमा पट्टी है. जिसको पार करके बांग्लादेश के लोग अपने देश से अपने देश में जाते है. वहाँ भारतीय फौज बड़ी चुस्ती से आने जाने वालों पर नजर रखती है, ज़रा सा भी व्यक्ति संदिग्ध लगा आदेश है - शूट आउट का. लेकिन सेना के जवान बहूत सतर्कता से यह कदम उठाते हैं क्योंकि हो सकता है भारत की शरहद लाँघ कर जाने वाले बंगलादेशी को यहाँ के नियम पता ना हो और वह अज्ञानता में कानून का उल्लघन कर रहे हों. भारत और बांग्लादेश के कई बॉर्डर पर भारतीय जवानों के इस भलमनसाहत का फायदा बांग्लादेशियों ने उठाया है, आज इसी का नतीजा है कि भारत में तीन करोड़ के आस पास बंगलादेशी घुसपैठ कर चुके हैं. और हम देखने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहे हैं.
सनोज कहता है- भारत के शरहदी इलाकों से जमकर बड़ी मात्रा में गायों की स्मगलिंग बांग्लादेश हो रही है. इसका इस्तेमाल वहाँ मांस के रूप में किया जाता है. इसपर रोक लगे इसके लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं. जबकि हमारे देश में गायों की संख्या लगातार कम होती जा रही है.

2 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

जनाब सब मिली भगत हे, वरना केसे कोई इतना कुछ कर ले.क्या आप के घर मे आप की इजाजत के बिना कोई घुस सकता हे ? अगर हां तो रात के अंधेरे मे चोर या डाकू, वो भी एक बार अगली बार आप चुस्त हो जाओगे, लेकिन हमारी सरकार ओर भी निकामी होती जा रही हे, बगला देश, पकिस्तान क्या हम से मजबुत हे, क्या इन मे हम से ज्यादा ताकत हे, लेकिन ....
बहुत धन्यवाद,अच्छे लेख के लिये

Anil ने कहा…

कई सौ साल पहले की बात है - चीन में मंगोलिया से घुसपैठिये घुस आते थे। रोज़ की बात हो चली थी। इनसे कैसे निपटा जाये? राजा ने सोच-विचार किया। फिर एक बेहद आसान रास्ता निकाला गया। एक दीवार बना दो। फिर कोई नहीं घुस पायेगा। चीन की दीवार बनायी गयी, और आज भी वो कायम है। सैकड़ों साल पहले चीन कर सकता था, तो क्या आधुनिक भारत के लिये दीवार बहुत महंगी हो गयी क्या?

आशीष कुमार 'अंशु'

आशीष कुमार 'अंशु'
वंदे मातरम