शनिवार, 6 सितंबर 2008

एक 'हिन्दू' चिन्तक का संदेश


अमित दूबे युवा पत्रकार हैं, आज उनका यह मेल आया ... ओर्कूट पर संदेश आया। संदेश आपकी नजर करते हैं। इस विषय पर अपने विचार से अवगत कराए। क्या आप अमित की बात से सहमत हैं या आपकी राय उनसे जुदा है।

कश्मीर में हिंदुओ का सफ़ाया हो गया पर हिंदू सोया रहा, बांग्ला देश में हिंदुओ का सफ़ाया हो रहा है पर हिंदू निंद्रा मगन है, पाकिस्तान में हिंदू तो दूर हिंदुओ के प्रतीक चिन्ह भी नही रहे पर हिंदू विश्राम अवस्था में है, मंदिरो में विस्फोट हों रहे है पर हमारी आँख है की खुलती नही, पाकिस्तानी लाल क़िले और संसद भवन तक आ गये पर हमारा ख़ून है की खौलता नही, अयोध्या में मस्जिद टूटती है तो कोहराम मच जाता है हर नेता वोट के लिए मुस्लिम परस्त बन जाता है लेकिन राम सेतु के लिए कोई नही चिल्लाता, गुजरात दंगो की बार बार CBI जाँच होती है पर गोधरा पीड़ितो की चीखे ना तो सरकार को सुनाई देती है ना CBI को और ना ही स्वयं हिंदुओ को, कश्मीर जल रहा है कुछ हिंदू अमरनाथ का सम्मान पाने के लिए तड़प रहे है पर बाक़ी देश के हिंदू सो रहे है, हिंदू देवी देवताओ की नग्न तस्वीरे बन रही है परंतु हिंदू करवट नही लेता, हमारे ग्रह मंत्री आंतकवादीओ को भाई बताते है, आडवाणी जिन्ना को धरम निरपेक्ष बताते है परंतु नरेंदर मोदी को "मौत का सौदागर" कहते है, अफ़ज़ल गुरु के लिए दया है पर विस्फोट में मरने वालो औरतो और बच्चो पे इन्हे दया नही आती ! कैसे देश वासी है हम !

5 टिप्‍पणियां:

nisha ने कहा…

हिन्दुस्तानी बन के सोचते तो अच्छा होता . किसी का दर्द सुनाई देता है इस बात से इन्हे शिकायत है. चलिए ये ही उद्घोषणा कर दें की किसका दर्द इस देश में सुना जाना चाहिए किसका नही. जब गर्भो को चीर कर उससे निकले अजन्मे बच्चों को जलाया जाय तो हमे कैसे खुशी से चीखना चाहिए और अपने घरों के पुरुषों को किस किस धर्म के मानने वाले पुरुषों और महिलाओं से कैसा व्यवहार करना है इस बात की शिक्षा कैसे दें ये भी ये हमे बता दें
. ये भी तय कर लिया जाय की ....................
क्या क्या कहूँ
दर्द हमे भी होता है लेकिन हम हिन्दुस्तानी बन के सोचते हैं अपने सभी देश वासियों के लिए ना की सिर्फ़ एक समूह के लिए भले वो सबसे बड़ा ही क्यों ना हो

Udan Tashtari ने कहा…

निवेदन

आप लिखते हैं, अपने ब्लॉग पर छापते हैं. आप चाहते हैं लोग आपको पढ़ें और आपको बतायें कि उनकी प्रतिक्रिया क्या है.

ऐसा ही सब चाहते हैं.

कृप्या दूसरों को पढ़ने और टिप्पणी कर अपनी प्रतिक्रिया देने में संकोच न करें.

हिन्दी चिट्ठाकारी को सुदृण बनाने एवं उसके प्रसार-प्रचार के लिए यह कदम अति महत्वपूर्ण है, इसमें अपना भरसक योगदान करें.

-समीर लाल
-उड़न तश्तरी

Shekhawat ने कहा…

निशा आपने सही कहा है हमें हिंदुस्थानी बन कर ही ज्यादा सोचने की जरुरत है

sab kuch hanny- hanny ने कहा…

ye soch ka ek paksh hai hai par hai sahi. hinduno k sath do baaten hain ek to we sokar taranhaar ka intjar karte hai or dusari baat hai ki wo smagrata me dekhne k naam par chup baithe rahte hain dharm ko to apne fayade or nuksan k liye prag karten hain.

jagat ने कहा…

hindustani bankar socha pakistan bangladesh chala gaya, hindustani bankar socha kashmir ja raha hai kashmiri pandit apane desh mein sharnarthi ho gaya, hindustani bankar soch rahe he to north east mein charch ke sarankshan mein NLFT,MIZO NATIONAL FRONT, TRIPURA NATIONAL VALONTEER, ULFA, BODO alag DESH maang rahe hai, hindustani bankar socha to bangladesh ghuspethiye Assam ke mool nivasiyon ko bhaagane ko mazboor kar rahe hai, aaj to Assam ke 23 jile bangladeshi ghuspethiye bahool ho gaye he, MLA unke beech se chuna jaata hai, intzaar hai Assam vidhansabha mein kab alag pradesh ki maang na utha de. hindustani bankar socha to Missionaries ko seva ke naam par sweekara tha pata nahin kab mataantaran kar hindu santo ke virudh bhadaka diya ki Orissa mein swami laxmananda ki hatya kar di, ab hindu samaaj mein pratikirya ho rahi he to bhaage phir rahe hai
chinta yeh nahin hai ki hum hindustani bankar sonche , jaroorat yeh bhi hai ki aur bhi to hindustani bankar sonche. jyaada likhe ko maaf karna khud bhugta hai isliye gussa aa raha hai

आशीष कुमार 'अंशु'

आशीष कुमार 'अंशु'
वंदे मातरम