बुधवार, 31 दिसंबर 2008

इंदौर में मुशायरा

हाल में इंदौर में आयोजित एक मुशायरे में मुनव्वर राना और तहसीन मुनव्वर ने शमा बाँध दिया. उनकी गजल से कुछ शेर यहाँ ब्लॉग बंधुओ के लिए :-
ये इंतखाब नहीं है तो किसका है
ये हर अजाब नहीं है तेरा तो किसका है,
क्यों अपने लोगों को पहचानता नही है तू
(पाकिस्तान के लिए कही गई पंक्ति थी)
अगर कसाब नहीं है तेरा तो किसका है?
- तहसीन मुनव्वर


- सिंध सदियों से हमारे मुल्क की पहचान है,
ये नदी गुजरे जहाँ से समझो हिन्दुस्तान है।
- मदीने तक में हमने मुल्क की खातिर दुआं मांगी,
किसी से पूछ लो इसको वतन का दर्द कहते हैं।
- तेरे आगे अपनी माँ भी मौसी जैसी लगती है,
तेरी गोद में गंगा मैया अच्छा लगता है।
- मुनव्वर राना

6 टिप्‍पणियां:

नीरज गोस्वामी ने कहा…

मुनव्वर राणा जी लाजवाब हैं....जिंदाबाद
नीरज

आशीष कुमार 'अंशु' ने कहा…

तहसीन मुनव्वर का शेर इस प्रकार है -

'ये इंतखाब नहीं है तेरा तो किसका है
ये हर अजाब नहीं है तेरा तो किसका है,
क्यों अपने लोगों को पहचानता नही है तू
अगर कसाब नहीं है तेरा तो किसका है?'

असुविधा के लिए खेद

श्रद्धा जैन ने कहा…

shukriya aashish ji us sher ko sudharne ke liye
pad kar laga ki sher kuch adhura sa hai

mushyare ke kuch aur sher agar aapko kahi se mile to zarur post kare

navvarsh ki hardik subhkamanaye

ब्रजेश ने कहा…

मुनव्वर राणा में में भारत की आतमा बसती है महान शायर।

संजीव कुमार सिन्हा ने कहा…

नववर्ष के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं।

hem pandey ने कहा…

शेर उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद.

आशीष कुमार 'अंशु'

आशीष कुमार 'अंशु'
वंदे मातरम