शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

झूठी खबर- और खंडन छापने से इंकार



मामला इंदौर का है, जहां एक बौबी छाबरा नाम के छोटे व्यवसाई के मामले को बौबी छाबरा नामक एक बड़े बिल्डर की कहानी बनाकर राजस्थान पत्रिका ने छाप दिया.जब बौबी ने इसका खंडन छापने के लिए अखबार के स्थानीय प्रबंधको से
निवेदन किया तो उन्होंने उसकी बात अनसुनी कर दी.मजबूरीवश उसे इस घटना से समबन्धित विज्ञापन अखबारों में देना पडा .खैर अखबार के खंडन ना छापने के रूख को उचित नहीं ठहराया जा सकता. इसका खामियाजा उसे दूसरे अखबारों में इस विज्ञापन के छपने के बाद चुकाना पड़ रहा है. इंदौर के साथियों के अनुसार बाद में उसने इस खबर के लिए माफी मांग ली है.

4 टिप्‍पणियां:

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

ये भारत देश है मेरा
जहां .........
कदम कदम पर .......

अर्शिया ने कहा…

बडे बडे देशों में ऐसी छोटी छोटी घटनाएं होती रहती हैं।
दुर्गापूजा एवं दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं।
( Treasurer-S. T. )

संजीव तिवारी ने कहा…

प्रिंट मीडिया की बातें हैं अंशु भाई. अर्शिया जी नें कह ही दिया है.

हमारी तरफ से भी दुर्गापूजा एवं दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं स्‍वीकारें.

रमेश आहूजा ने कहा…

पत्रिका का ये काला कारनामा बेशर्मी भरा है. अपनी लापरवाही या जानबूझकर अपने हित न साधे जाने पर किसी निर्दोष की बेइज्जती कर देना पत्रकारिता नहीं है. यदि गलती हो ही गई है तो उसे क्षमा मांगते हुये स्वीकार करना चाहिये.

श्री बाबी छाबड़ा को कोर्ट जाकर इसके खिलाफ वाद प्रस्तुत करना ही चाहिये.

आपको बहुत धन्यवाद. मैं तो पत्रिका को खरीदना ही बंद कर रहा हूं.

आशीष कुमार 'अंशु'

आशीष कुमार 'अंशु'
वंदे मातरम