
कल मुझे अपनी बाइक की आर सी छुडवाने के लिए कोर्ट जाना पडा। 2-3 वकीलों ने मुझे घेरने की कोशिश की। एक ने कहा कि 2000 रू फाइन लगता है, मैं 1000 सा 1200 करवा दूंगा। 200 मुझे दे देना। दूसरे ने 300 मांगे और 1200 रू तक करवाने की बात कही। मैं उन्हें नजरअंदाज करके सीधा मजिस्ट्रेट से मिला। केवल 700 रू लगे। क्या वास्तव में वकील न्याय प्रणाली को सरल बना रहे हैं या फिर वे इसे आम व्यक्ति के लिए दुर्लभ और मंहगा बनाने में जुटे हैं? आप ही बताएं।
1 टिप्पणी:
सही है .. यही हो रहा है चारों ओर ..
माध्यम जन-विरोधी भूमिका में है ..
जन - जागृति ही इनका विरोध कर देगी .. ऐसा विश्वास है ..
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