शनिवार, 10 अप्रैल 2010

गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

ब्रेख्त

पेंटिंग्स



कनालन रजा का मेल मिला, चेन्नई में ६-१८ अप्रैल तक रमेश गोर्जाल की पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लगाने वाली है. पता है - ३३, वूड्स रोड, चेन्नई (मोबाईल न. ०९८४१०३७८१०).


अगर आप चेन्नई में हैं तो प्रदर्शनी में जा सकते हैं, नहीं हैं तो उनके पेंटिंग्स की एक छोटी प्रदर्शनी अपने ब्लॉग पर ही लगा देते हैं...




मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

चले आओ चक्रधर चमन में

सोमवार, 5 अप्रैल 2010

कल मुझे कोर्ट जाना पडा

रविशंकर भाई ने जी मेल बज पर कल कोर्ट में आर सी छुड़ाने के दौरान उनके साथ जो हुआ उसका संक्षिप्त विवरण लिखा था. इसमे उन्होंने देश में वकील व्यवस्था पर सवाल उठाया है.

कल मुझे अपनी बाइक की आर सी छुडवाने के लिए कोर्ट जाना पडा। 2-3 वकीलों ने मुझे घेरने की कोशिश की। एक ने कहा कि 2000 रू फाइन लगता है, मैं 1000 सा 1200 करवा दूंगा। 200 मुझे दे देना। दूसरे ने 300 मांगे और 1200 रू तक करवाने की बात कही। मैं उन्हें नजरअंदाज करके सीधा मजिस्ट्रेट से मिला। केवल 700 रू लगे। क्या वास्तव में वकील न्याय प्रणाली को सरल बना रहे हैं या फिर वे इसे आम व्यक्ति के लिए दुर्लभ और मंहगा बनाने में जुटे हैं? आप ही बताएं।

शुक्रवार, 2 अप्रैल 2010

मृत प्रेमिका से शादी





२६ वर्षिय एक चीनी युवक जुआंग आगुई ने अपनी २१ वर्षिय मृत प्रेमिका हूँ जाओ से शादी की. शादी की रश्म दाह कर्म से ठीक पहले निभाई गई. (यह सारी जानकारी शंकर ने मेल की)













गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

आज एक साल का हो गया, किन्नरों का ब्यूटी पार्लर

पार्लर की मुख्य ब्यूटिशियन सिमी अपने ग्राहक के साथ




हमारे पास कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है कि इस देश में कितने किन्नर हैं। क्योंकि वे जनगणना में या तो पुरुष होते हैं या अधिक मामलों में स्त्री। किन्नर शब्द हमारे समाज में गाली की तरह ही इस्तेमाल होता रहा है। यदि किसी ‘मर्द’ को किन्नर कह दो तो वह मरने-मारने पर उतारू हो जाएगा। नीलम गुरु को कैसे आप भूल सकते हैं, जिन पर अपने बयान को बदलने के लिए लगातार अपराधी तत्वों का दबाव था, लेकिन उन्होंने अपना बयान नहीं बदला। उनकी हत्या तीस हजारी कोर्ट में कर दी गयी। जबकि जान के डर से अदालत में अपने बयान बदलने वाले तथाकथित मर्दों की कमी नहीं। फिर ‘मर्द’ कौन, और किन्नर कौन?

सच तो यह है कि किन्नरों को इस समाज में दलितों से अधिक अपमान सहना पड़ा है, लेकिन यह जमात हमेशा से उपेक्षित है। क्या कभी हमें इस बात का ख्याल आया कि जरा इन किन्नरों के हित की बात भी करें, जिनके लिए बैंक में अकाउंट खोलना तो दूर की बात, पहचान पत्र से लेकर राशन कार्ड बनवाना तक बेहद चुनौतीपूर्ण है। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद समलैंगिकों और किन्नरों के एक समूह ‘पहल’ ने जब फरीदाबाद में किन्नर के लिए एक विशेष पार्लर की शुरुआत की तो आशा की एक किरण नजर आयी। भड़ास वाले रूपेश भाई (जिन्हें पनवेल वाले रूपेश पनवेलकर और पनवेल से बाहर वाले रूपेश श्रीवास्तव के नाम से जानते हैं) की चिंता यही है कि कभी किन्नरों से जुड़े मसलों को गंभीरता से नहीं उठाया गया। खैर आइए, फरीदाबाद में खुले किन्नरों द्वारा, किन्नरों के लिए चलाये जा रहे इस पार्लर का स्वागत करें।

फरीदाबाद के सेक्टर 35 के मेन मार्केट में स्थित उन दो कमरों को आप सैलून कह सकते हैं या फिर ब्यूटी पार्लर कह सकते हैं। लेकिन ‘पहल’ फाउंडेशन द्वारा चलाये जा रहे उस पार्लर की खासियत उसके पार्लर होने में नहीं बल्कि भारत में किन्नरों के लिए चल रहे अपनी तरह के पहले पार्लर के रूप में है। इनके ग्राहकों की संख्या अधिक नहीं है। प्रतिदिन लगभग 8-10 ग्राहक ही इन्हें मिल पाते हैं। यदि किसी पर्व त्योहार का मौसम रहा है तो बात दूसरी है। पार्लर की एक ब्यूटिशियन कहती हैं – ‘यदि मौका किसी त्योहार का हो तो सांस लेने की भी फुर्सत नहीं होती है।’

पार्लर की योजना ‘पहल’ के निदेशक यशविंदर सिंह की है। यशविंदर बताते हैं- ‘यह पार्लर मुख्य रूप से किन्नरों के लिए ही है। वैसे उनके दोस्त या कोई और भी यहां आना चाहें तो हमारे दरवाजे उनके लिए भी खुले हैं।’

इस वक्त पार्लर में मुख्य ब्यूटिशियन सिमी के साथ लगभग एक दर्जन ब्यूटिशियन काम कर रहे हैं। पिछले साल दो अप्रैल से शुरू हुआ यह पार्लर एक साल के अंदर दिल्ली और फरीदाबाद के किन्नरों के डेरों (जहां किन्नर समुदाय के लोग समूह में रहते हैं) में चर्चा का विषय बना है। अच्छी संख्या में वे न सिर्फ पार्लर तक आ रहे हैं बल्कि विशेष अवसरों पर यहां से ब्यूटिशियनों को अपने साथ भी ले जा रहे हैं। पार्लर की मुख्य ब्यूटिशियन सिमी एक किन्नर हैं। उन्‍होंने 11वीं तक की पढ़ाई दिल्ली से की है और इन दिनों वह फरीदाबाद में अपने परिवार के साथ रहते हैं। सिमी ने बताया, पार्लर में अपने काम को वह खूब इन्जॉय कर रहे हैं।

मामला सिर्फ किन्नरों की खूबसूरती से जुड़ा नहीं है बल्कि यहां किन्नरों को अच्छी-खासी वैचारिक खुराक भी दी जाती है। किन्नरों में स्वास्थ और स्वच्छता को लेकर जागरूकता की बेहद कमी है। इन दोनों विषयों पर ‘पहल’ के कार्यकर्ता ब्यूटिशियन अपने किन्नर ग्राहकों के साथ चर्चा करते हैं। उनकी राय जानते हैं और इन विषयों पर उनकी जिज्ञासा का निराकरण भी करते हैं। समय-समय पर इसके लिए चौपाल का भी आयोजन किया जाता है, जहां किन्नर और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग इकट्ठा होते हैं और हर बार किसी एक विषय पर विस्तार से चर्चा होती है।

पार्लर की मुख्य ब्यूटिशियन सिमी के अनुसार उसके पास अभी कई जगहों से नौकरी के ऑफर है, जहां निश्चित तौर पर यहां से अच्छी आमदनी हो सकती है। लेकिन यहां काम करना उसे अच्छा लगता है।

पार्लर की आगामी योजना के संबंध में यशविंदर बताते हैं कि वे इस तरह का पार्लर देश के दूसरे हिस्सों में भी खोलना चाहते हैं। उनका उद्देश्य पार्लर के माध्यम से किन्नरों को सिर्फ सुंदर बनाना नहीं है। वे चाहते हैं, समाज इस तीसरे जेंडर को स्वीकार करे। उसी प्रकार जिस प्रकार वह स्त्री और पुरुष को स्वीकार करता है। यदि ईश्वर ने इन्हें तीसरे जेंडर के रूप में इस संसार में भेजा है, तो इसमें इनका कोई कसूर तो नहीं है। यशविंदर जानना चाहते हैं, फिर उसकी सजा किन्‍नरों को समाज में हाशिये पर डाल कर क्यों दी जा रही है? जिस प्रकार एक स्त्री और पुरुष की भावना होती है, उनकी संवेदना होती है, उसी प्रकार की भावना और संवेदना किन्नर समाज के लोगों में भी होती है। यह समाज को समझना होगा।

आशीष कुमार 'अंशु'

आशीष कुमार 'अंशु'
वंदे मातरम